यह बात उस समय की है जब मैं कॉलेज में नया नया गया था मेरा फर्स्ट सेमेस्टर था। हमारी क्लास में केवल 25 स्टूडेंट्स थे।
मेरी एक सीनियर थी बहुत ही सुंदर हालांकि उनका रंग ब्राउन था पर उनका नाक नक्शा बहुत ही आकर्षक था। हमारे बैच के सभी लड़के उन्हें देखकर ठंडी आहे भरते थे। और मन ही मन सोचते थे काश यह मिल जाय। मैम का नेचर भी काफी ओपन था वे भी सभी लोगो से खूब बात किया करती थी।
एक दिन उनकी क्लास थी और उनके पास लेक्चर नोट्स बनाने के लिए लैपटॉप की जरूरत थी। उन्होंने सभी से पूछा पर कोई उन्हें लैपटॉप देने को तैयार नही हुआ। अंत में किसी ने उन्हें मेरा लैपटॉप लेने का suggestion दिया। वे मेरे पास आई और लैपटॉप कद लिए कहा। मैंने बिना कोई क्वेश्चन किये बैग से अपना लैपटॉप निकाल कर उन्हें दे दिया।
इसी बीच मेरी क्लास स्टार्ट हो गयी मैं क्लास लेने चला गया। क्लास के बीच में उन सीनियर मैम ने मुझे आवाज लगाई । लेक्चरर के इशारा करने पर उन्होंने मेरा लैपटॉप लास्ट सीट पर रखा और चली गयी । 2 घंटे बाद लेक्चर खत्म हुआ मैंने अपना लैपटॉप उठाया। और होस्टल चला गया। वहां जाकर जब लैपटॉप खोला तो उसमें एक खूबसूरत पेंट की फ़ाइल थी जिसमे दिल बना हुआ था।
मैंने उस फ़ाइल को इग्नोर किया और अपना काम करके लैपटॉप बन्द कर दिया।
कुछ समय बाद हमे प्रोजेक्ट गाइड असाइन हुए। वक़्त की बात मुझे भी वही प्रोजेक्ट गाइड मिल गए जो उन मैम के थे। अच्छा प्रोजेक्ट गाइड मिलने से पहले मैम एक दो बार कैफेटेरिया में मिली थी तो उन्होंने मुझे कॉफी आफर की। मेरे बहुत मना करने पर भी उन्होंने

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